Tuesday, August 1, 2017

इश्क के उजले और स्याह पक्ष
इश्क के अनेकों आयाम और अंजाम होते हैं। हर व्यक्ति का इसके बारे में अपनी-अपनी पृष्ठभूमि और अनुभवों के अनुरूप अपना फससफा है, जो कि एक दूसरे से बिल्कुल जुदा-जुदा है। इसके जुदा होने के कारणों पर जाएं तो मुख्य रूप से समाज, परिवार, जाति, नस्ल, धर्म, संस्कृति, शिक्षा, पर्यावरण, हर व्यक्ति का अपना अनूठा व्यक्तित्व एवं परिस्थितियों के अनुरूप बदलती मनःस्थिति को जिम्मेदार माना जा सकता है। प्यार को जितने रूमानी अंदाज में सिर्फ दो स्वतंत्र व्यक्तियों का अंदरूनी मामला माना जाता है, ज्यादातर मामले में ऐसा होता नहीं है। इश्क का अंजाम उसके स्वयं से लेकर घर-परिवार, यहाँ तक कि पूरे देश और समाज को प्रभावित करता है। हम अगर इसके अनेक आयामों पर न जाकर सिर्फ सकारात्मक और नकारात्मक पक्षों की ही बात करें तो यही कहा जा सकता है कि इश्क सफल रहा तो उसके सकारात्मक परिणामों से पूरे समाज को एक रचनात्मक उर्जा मिलती है, जिससे समाज में जड़ जमाए अनेक दकियानूसी विचारों एवं बुराइयों से मुक्ति का मार्ग खुलता है। और नकारात्मक हुए तो स्वयं उसके कर्त्ता के साथ-साथ उसके परिवार और समाज के लिए भी अत्यंत घातक होता है। पिछले दिनों दिल्ली में दो ऐसी घटनाएँ घटीं, जिससे इन दोनों पक्षों को बखूबी समझा जा सकता है।
दिल्ली के यमुनापार मानसरोवर पार्क का रहने वाले आदिल और रिया 2015 से एक दूसरे को जानते थे। आदिल स्कूल वैन चलाता था। वह रिया के घर के पास से एक छात्र को रोजाना स्कूल पहुंचाने के लिए आता था। दोनों में दोस्ती हुई। धीरे-धीरे दोस्ती परवान चढ़ी, बात करने के लिए आदिल ने महंगा मोबाइल खरीदकर रिया को दिया। एयर होस्टेस का कोर्स करने वाली रिया की स्कूल का वैन चालक आदिल की दोस्ती का पता जब रिया के घरवालों को चला तो उन्होंने इसका विरोध किया। वह आदिल से दूरी बनाने लगी। नाराज होकर आदिल ने उसे धमकाना शुरू कर दिया। परेशान आदिल ने अलीगढ़ जाकर अपने दोस्तों से रिया की नाराजगी के बारे में बताया। उसने दोस्तों के साथ प्लान बनाया कि रिया को खत्म कर दिया जाए। इसके बाद आदिल के साथियों ने रिया की रेकी शुरू कर दी। उसने चाकू खरीदा। वारदात के दिन जैसे ही रिया मानसरोवर पार्क इलाके में पहुंची तो आदिल ने उससे गिफ्ट में दिया गया मोबाइल फोन वापस देने के लिए कहा। दोनों के बीच झगड़ा होने लगा। तभी आदिल ने चाकू निकाला और रिया पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस हमले में रिया की मौत हो गई। वारदात को अंजाम देकर आदिल मुंबई भाग गया। पुलिस ने इनपुट के आधार पर आदिल और उसके साथियों को वहां से धर दबोचा। हत्या के बाद यह खुलासा भी हुआ है कि घटना से पहले रिया ने पुलिस को लिखित शिकायत की थी कि आदिल से उसकी जान को खतरा है।
दूसरी घटना में दोनों प्रेमी की एक कोठे पर मुलाकात हुई थी। इसके बाद दोनों अलग-अलग जगह मिलने लगे और एक-दूसरे को पसंद करने लगे। नेपाल की लड़की वर्ष 2015 में वहां आए भयानक भूकंप में सबकुछ खत्म हो जाने की वजह से परिवार के भरण-पोषण करने के इरादे से दिल्ली आ गई और रोजगार के लिए प्रयास करने लगी। काम ढूंढ़ने के दौरान उसे ढाई साल पहले किसी दलाल ने धोखे से बेच कर जीबी रोड पहुंचा दिया। पेशे से ड्राइवर 28 वर्षीय युवक से उसकी मुलाकात कोठे पर ही हुई। लगातार वह लड़की से मिलने जाता रहा, दोनों में प्यार इतना गहरा हो गया कि दोनों किसी तरह भागकर शादी करना चाहने लगे। कई बार लड़के ने उसे भगाने की कोशिश भी की, मगर कभी सफल नहीं हो पाए, उल्टे लड़की से मारपीट भी की गई। आखिर में युवक ने किसी की सलाह पर दिल्ली महिला आयोग से मदद मांगी। दोनों को परखकर आयोग ने एक स्वैच्छिक संगठन और पुलिस की मदद से युवती को वहां से निकाला। आयोग ने कहा कि युवती ने अपनी नई जिंदगी शुरू करने की इच्छा जताई है। यही नहीं युवक का परिवार भी उसे अपनाने को तैयार है। वे जल्द ही शादी करेंगे।
दुनियावी प्यार, जिसमें एकसाथ घर-परिवार बसाने से है। उसके लिए जो प्राथमिक सोपान हैं- एक दूसरे के प्रति अदम्य चाहत, घर-परिवार और समाज की स्वीकृति और तीसरा कानून या सरकारी सुरक्षातंत्र का साथ। अगर पहला सोपान यानी प्यार की नींव मजबूत हो तो आज के समय में खासकर महानगरों में घर-परिवार और समाज की स्वीकृति ना-नुकर के बाद मिल ही जाती है। और न भी मिले तो कानूनी मापदंडों पर खरे उतरने पर उसके सहयोग से मंजिल मिल जाती है। रिया की नृशंस हत्या आदिल ने इसलिए कर दी कि वह इस बात को स्वीकार ही नहीं कर सका कि कुछ दिनों पहले तक जो रिया उससे प्यार कर रही थी, उसे अपने पारिवारिक और कैरियर के अनुरूप एक वैन ड्राइवर आदिल को न चाहने की आजादी भी हासिल है। आदिल की सामाजिक पृष्ठभूमि एवं हिंसक स्वभाव यह मानने को तैयार ही नहीं था कि कुछ दिनों पहले तक उससे गिफ्ट लेने व हमेशा बात करने वाली लड़की उससे मुंह चुराये। गुस्से में उसने अपने साथियों के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी।
दूसरी तरफ 28 वर्षीय युवक एवं कोठे पर धंधा करने को मजबूर लड़की का प्यार इसलिए सफलीभूत हो सका कि वे एक-दूसरे की पृष्ठभूमि को समझबूझकर, अपने परिवार को साथ लेकर अपने प्यार को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अनवरत प्रयास करते रहे। और सबसे बड़ी बात यह कि उन्हें तीसरे पक्ष यानी दिल्ली महिला आयोग, पुलिस एवं स्वैच्छिक संगठन का साथ मिला। काश! रिया को भी आदिल से लगातार मिल रही धमकियों के समय की गई शिकायत पर पुलिस त्वरित कार्रवाई करती, तो रिया एयर होस्टेस बन स्वप्नों एवं उमंगों की उड़ान भरती होती और आदिल भी कम से कम हत्यारा होने से बच जाता।
प्यार को जितना आंतरिक समझा जाता है, वास्तविक सामाजिक जीवन में ऐसा होता नहीं है, वही प्यार स्वप्नों एवं उमंगों की इन्द्रधनुषी छटा बिखेर पाता है, जो दो स्वतंत्र व्यक्तियों के बीच अंकुरित होकर एक जनतांत्रिक परिवार, समाज और कानून यानी सरकार के संरक्षण में पलकर पल्लवित-पुष्पित हो चहुँओर खुशबू बिखेरे!        


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