निर्मल हृदय की निर्ममता
रांची स्थित ‘निर्मल हृदय’ में मासुम
बच्चों को बेचने की खबरों से सालों पहले घटी एक दुखद घटना बरबस याद आ गई। मैं इंटर
पास करके दिल्ली आगे की पढ़ाई करने आया था। मेरे बड़े भाई मदनगीर के पास दक्षिणपुरी
में झुग्गी बासिंदो के लिए 20 गज की जमीन पर बने कमरे में
किराये पर रहते थे। दिन में वे ऑफिस चले जाते थे और मैं ज्यादातर कमरे पर ही रहता
था। बगल में ही रहने वाला एक लड़का दीपक जो मुझसे कुछ छोटा यानी 15-16 साल का, सुंदर, लंबा और छरहरा
किशोर था। हमेशा मेरी सहायता करने के लिए तत्पर रहता, अक्सर
शाम को पास के किसी पार्क मंदिर या मार्केट घुमाने ले चलता। एक दिन दोपहर में कुछ
पढ़ते हुए आंखे लग गई थीं। नीचे गली में एकाएक बड़ा शोर सुनाई पड़ा देखा तो लोमहर्षक
दृश्य देखकर आवाक् रह गया। पता चला कि दीपक विराट सिनेमा के पास मैदान में दोस्तों
के साथ खेल रहा था, किसी बात पर लड़ाई हुई और किसी लड़के ने
उसके सीने में बड़ा सा चाकू जोरों से घुसेड़ दिया। वह लहू से लथपथ तीव्र गति से
माँ...माँऽऽऽ...चिल्लाते हुए करीब एक किलोमिटर की दूरी चंद मिनटों में ही तय करके
अपनी गली में खाट पर बैठी अपनी माँ की छाती में समाता चला गया और कुछ ही पलों में
दम तोड़ दिया। उसकी आखें जड़ हो गईं, मां पत्थर बन गई! पूरी
गली स्तब्ध जहाँ का तहाँ जम गयी थी।
बीमार, असहाय, गरीबों को सहारा
देनेवाली, संवेदना और ममता की प्रतिमूर्ति मानी जानेवाली मदर
टेरेसा, जिन्हें भारत रत्न, नोबेल
पुरस्कार, तथा मृत्यु के बाद संत का दर्जा दिया गया। उनकी
संस्था ‘मिशनरीज ऑफ चौरिटी’ की ओर से
संचालित संस्था ‘निर्मल हृदय’ पर बड़ी
मात्रा में बच्चे को बेचने एवं मानव तस्करी में संलग्न पाया गया है। झारखंड की
राजधानी रांची स्थित ‘निर्मल हृदय’ की
संचालिका सिस्टर कोंसिलिया बाखला, सिस्टर मेरिडियन और
कर्मचारी अनिमा को 4 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया गया है।
पुलिस को दिए बयान के मुताबिक सिस्टर कोंसिलिया ने स्वीकारा है कि उसने अब तक छह
बच्चों को अवैध तरीके से बेचा है। यह मामला तब खुला जब यूपी के सोनभद्र जिले के
ओबरा निवासी सौरभ अग्रवाल बाल कल्याण समिति के पास शिकायत लेकर पहुंचे कि उन्हें
उनका बच्चा वापस नहीं दिया जा रहा है। इस बच्चे को उन्होंने पाँच मई को 1.20 लाख रु. में खरीदा था।
एफआईआर में दर्ज जानकारी के मुताबिक गुमला की एक
रेप पीड़िता अविवाहित लड़की ने बीते एक मई को रांची सदर अस्पताल में बच्चा को जन्म
दिया। इस नवजात को कर्मचारी अनिमा इंदवार तथा सिस्टर कोंसिलिया ने अग्रवाल दंपती
को बेच दिया। इधर 30 जून
को सीडबल्यूसी के सदस्यों ने संस्था का दौरा किया था। इससे डरकर अनिमा ने उसी दिन
अग्रवाल दंपति को फोन कर कहा कि बच्चे को अदालत में पेश करना है, उसे लेकर रांची आ जाइए। उन्होंने बच्चे को दो जुलाई अनिमा को दे दिया। तीन
जुलाई को बच्चे की जानकारी लेने वह संस्था पहुंचे, जहाँ
उन्हें बच्चे से नहीं मिलने दिया गया। इसके बाद उसी दिन उन्होंने इसकी शिकायत
सीडबल्यूसी से की। सूचना मिलते ही चेयरमैन रूपा कुमारी ‘निर्मल
हृदय’ पहुंची।
बाल कल्याण समिति, जिला समाज कल्याण अधिकारी, पुलिस
तथा अन्य अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि निर्मल हृदय में रहीं
पीड़िताओं जिनमें बिन ब्याही मां, रेप की शिकार बेसहारा
लड़कियां-महिलाएं जो बच्चा जनने वाली होती हैं, उन्हें ‘निर्मल हृदय’ में रखा जाता है। इन्हीं से जन्मे और
शिशु भवन में रखे गए 280 बच्चों का कोई अता-पता नहीं है। अब
तक की जांच के दौरान जब्त किए गए कागजात के अनुसार 2015 से 2018 तक उक्त दोनों जगहों (निर्मल हृदय, शिशु भवन) में 450 गर्भवती पीड़िताओं को भर्ती कराया गया। इनसे जन्मे 170 बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया या जानकारी दी
गई। शेष 280 बच्चों का कोई अता-पता नहीं है।
इस काले धंधे से जुड़े लोगों की पहुँच इतनी है कि
बच्चों की खरीद-बिक्री के खेल पर हाथ डालने वाले सीडब्ल्यूसी के तत्कालीन अध्यक्ष
ओमप्रकाश सिंह और सदस्य मु.अफजल जब 2015 में डोरंडा स्थित शिशु भवन का निरीक्षण करने गए
थे। इस दौरान उन्हें वहां घुसने से रोका गया, जबरन जांच के
लिए घुसे तो छेड़छाड़ का आरोप लगाकर साजिश के तहत बर्खास्त करा दिया गया। इसके बाद
लंबे समय तक अध्यक्ष का पद खाली रहने के बाद अपने अनुकूल जहांआरा को प्रभारी
अध्यक्ष बनवाया गया ताकि वे मिलजुलकर इस कुकृत्य को चलाते रहें।
मदर टेरेसा पर उनके जीते जी और मरने के बाद भी
देश-विदेश के अनेक लोगों ने समाजसेवा के नाम पर धर्म परिवर्तन करवाने तथा तथा
दुनिया भर से चंदे के रूप में मिलने वाले अरबों रुपयों का गलत इस्तेमाल का आरोप
लगता रहा है। जिसपर अधिकांश लोगों ने ध्यान नहीं दिया तथा उन्हें असहायों की माँ
मानते रहे और उनकी संस्थाओं को सम्मान देते रहे। परंतु अब जब ‘निर्मल हृदय की अनेक शाखाओं
द्वारा बच्चों को बेचने और मानव तस्करी के नित नए प्रमाण मिल रहे हैं तो यह बड़ा
विश्वासघात है।
बीसेक साल पहले दिल्ली के दक्षिणपुरी के दीपक को
किसी ने चाकू मारा वह जनून में आखिरी दम तक मौत से संघर्ष करते हुए माँ के आंचल
में समा जाना चाहता था उसे यह एहसास था कि यहाँ सारे कष्टों से मुक्ति मिल जाएगी।
असहाय, अत्यंत
दुखी और बलात्कार की शिकार अनेक लड़कियां और औरतें भी इसी आशा से निर्मल हृदय की
शरण लेती हैं कि वहां उन्हें एक नया जीवन मिलेगा, परंतु ‘निर्मल हृदय’ में तो उनके मजबूरियों को ही व्यापार
में बदलकर मानव तस्करी की जा रही है। यह तो ठीक यही बात हुई कि दीपक मरणांतक पीड़ा
से चीत्कार करते हुए आ रहा हो, उधर उसकी माँ मानव अंग के
तस्करों से पहले से ही सौदा कर तैयार रखा हो कि जैसे ही दीपक आए मरने से पहले ही
उसके सारे अंगों को निकाल-निकालकर बेच दे। ‘निर्मल हृदय’
की निर्मम हृदयहीनता मानव समाज एवं सभ्यता की बहुत बड़ी त्रासदी है!
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